April 21, 2024
Bundeli Artists of Lalitpur

bundeli artists of lalitpur – ललितपुर के बुन्देली कलाकारों को मिलेगा प्रोत्साहन

(ललितपुर) bundeli artists of lalitpur – ललितपुर के बुन्देली कलाकारों, मण्डलायुक्त झांसी मण्डल डा. अजय शंकर पाण्डेय के निर्देशानुसार जनपद की संस्कृति, पर्यटन, रीतिरिवाज, कला, लोकायन तथा लोकनृत्य को प्रोत्साहित करने हेतु गठित समितियों के साथ जिलाधिकारी आलोक सिंह की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई।

bundeli artists of lalitpur – पर्यटकों के आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे

बैठक में सह नोडल, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी पीयूष चन्द्र राय ने बताया कि जनपद की प्राकृतिक व ऐतिहासिक सम्पदा इतनी समृद्ध है कि यदि इसे व्यवस्थित तरीके से विकसित कर विश्व पटल पर रखा जाये तो यहाँ पर्यटकों का न सिर्फ आकर्षण बढ़ेगा बल्कि विलुप्त हो रहीं ऐतिहासिक इमारतों व पर्यटन स्थलों को नवजीवन मिलेगा, साथ ही पर्यटकों के आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे।

bundeli artists of lalitpur – अविरल धारा का सातत्य आज भी बना हुआ है

bundeli artists of lalitpur – ललितपुर के बुन्देली कलाकारों, उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अतीत की एक स्वर्णिम एवं गौरवशाली, ऐतिहासिक स्मृतियों का साक्षी रहा है। इस क्षेत्र में इतिहास, साहित्य और संस्कृति की अविरल गंगा सदियों से प्रवाहित होती रही है। इस अविरल धारा का सातत्य आज भी बना हुआ है। इस क्षेत्र में तमाम ऐसी महान विभूतियाँ हुई हैं जिन्होंने इस अविरल धारा को अक्षुण्ण बनाये रखने में अपना अमूल्य योगदान दिया है। यहाँ की परंपराओं, रीतिरिवाजों, जीवन दर्शन में विविधताओं की एक लंबी फेहरिस्त मोजूद है।

इस क्षेत्र की तमाम अनकही बातें, परंपरायें, साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ सम्पूर्ण देश एवं मानवता के लिए ध्यानाकर्षण योग्य है। उन्होंने बताया कि मण्डलायुक्त डा. अजय शंकर पाण्डेय की परिकल्पना है कि ललितपुर जनपद के इतिहास, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को एक वैज्ञानिक प्रमाणीकृत रुप से देश के समक्ष रखने की आवश्यकता है, इसके लिए 4 मानकों- संकलन, अन्वेषण, संरक्षण एवं शोध पर कार्य करने की आवश्यकता है।

08 समितियों का गठन किया गया है

ललितपुर के बुन्देली कलाकारों, जिसके लिए 08 समितियों का गठन किया गया है, जिसमें साहित्य विंग, सांस्कृतिक विंग, विशिष्ट कृषि उत्पादन संरक्षण एवं फ्लो फना विंग, पर्यटन एवं एतिहासिक स्थल विंग, क्षेत्रीय व्यंजन एवं रीतरिवाज विंग, जल संरक्षण विंग, हस्त शिल्प एवं उद्योग धंधों से सम्बंधित विंग, पर्ल्स ऑफ बुन्देलखण्ड विंग शामिल हैं।

गठित समिति के कार्यों की नियमित समीक्षा

bundeli artists of lalitpur – उन्होंने बताया कि इन समितियों के माध्यम से जनपद की विभिन्न विरासतों का संकलन, संरक्षण, अन्वेषण एवं शोध हेतु गठित समिति के कार्यों की नियमित समीक्षा, समिति की आयोजित की जाने वाली गतिविधियों में भाग लेना, समिति की कार्य प्रकृति के अनुसार उनके कार्यों, गतिविधियों का निर्धारण, पुर्ननिर्धारण कराते हुए वार्षिक कार्य योजना तैयार कराना तथा उसके क्रियान्वयन हेतु प्रोत्साहित करना।

संभावनाओं को तलाशने का कार्य किया जाएगा

समिति के कार्यों को गति देने के लिए विभिन्न स्तर पर समन्वय, सहयोग, मार्ग दर्शन प्रदान करना तथा आवश्यकतानुसार समितियों के आयोजनार्थ निजी क्षेत्र की सहभागिता, प्रायोजक खोजने में सहयोग करना, समिति की प्रस्तावित गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु उ. प्र. सरकार के संबंधित विभागों को प्रस्ताव प्रेषित कराने में सहयोग करना तथा उक्त विषय के क्षेत्र में कार्य कर रहीं अन्य संस्थाओं, एजेंसियों से वित्तीय सहयोग की संभावनाओं को तलाशने का कार्य किया जाएगा।

इसके लिए रणनीति तैयार की गई है, जिसमें गठित की गई समितियों का पंजीकरण कराया जाएगा, तय किये गये विषयों पर कान्सेप्ट नोट तैयार किये जायेंगे, संबंधित क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों से परिचर्चा कर दीर्घकालिक रणनीति व गतिविधियों का निर्धारण तथा निर्धारित गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना का निर्माण,

गतिविधियों का क्रियान्वयन व नियमित समीक्षा

संबंधित विभागों के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर सहयोग व समन्वय, मेन्टरिंग ग्रुप (मार्गदर्शक समूह) का गठन, गतिविधियों का क्रियान्वयन व नियमित समीक्षा, विभिन्न विभागों व संस्थाओं से समन्वय, निजी क्षेत्र की सहभागिता, शासन की विभिन्न योजनाओं से समिति के कार्यों को जोड़ना तथा समितियों की गतिविधियों के आयोजन हेतु सी. एस. आर. से जोड़ा जाएगा।

बैठक में प्रो. भगवत नारायण शर्मा, देवेन्द्र गुरु श्रीवास्तव, फिरोज डायमण्ड, संजीव बाबरा आदि कला, संस्कृति एवं पर्यटन से जुड़े महानुभावों ने भी जनपद के गौरवशाली इतिहास व संस्कृति के बारे में अपने-अपने विचार प्रकट किये। बैठक में जिलाधिकारी ने गठित समिति के सदस्यों से उनका परिचय प्राप्त करते हुए कहा कि जनपद के इतिहास, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को विकसित करने के लिए जो समितियां गठित की गई हैं वे सभी अपने अपने स्तर पर बैठक कर अपने दायित्वों की कार्ययोजना तैयार कर लें।

इस अभियान में अधिकतर अभिनव जनसहभागिता से किये जाने है, इसलिए कला, संस्कृति एवं पर्यटन से जुड़े लोग पूरी गंभीरता के साथ इस अभियान से जुड़कर कार्य करें, साथ ही जहां प्रशासन के सहयोग की आवश्यकता होगी, वहां प्रशासन पूर्ण रुप से सहयोग करेगा। मण्डलायुक्त महोदय की परिकल्पना के अनुसार गठित समितियों को दायित्व सौंपे गए हैं, प्रत्येक समिति अपने दायित्वों की प्रगति रिपोर्ट प्रति सप्ताह सहनोडल अधिकारी को उपलब्ध करा दे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे लवकुश त्रिपाठी, संस्कृत विभागाध्यक्ष ने0म0वि0 डॉ0 ओम प्रकाश शास्त्री, जिला उद्यान अधिकारी परवेज खान, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी पीयूषचन्द्र राय, प्रवक्ता डायट कीर्ति शुक्ला, अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विनय अग्रवाल, उपायुक्त मनरेगा रविन्द्र वीर यादव, भूमि संरक्षण अधिकारी ललितपुर रामअवतार, भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेन्द्र सिंह निरंजन सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।


कश्मीर का गुलमर्ग है, धरती का स्वर्ग

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