April 20, 2024
नियमित खानपान व दवाई ने भाई-बहन को कुपोषण से दिलाया छुटकारा

नियमित खानपान व दवाई ने भाई-बहन को कुपोषण से दिलाया छुटकारा

संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत किए गए थे चिन्हित

ललितपुर। कुपोषण की समस्या निपटने के विभाग लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर जब सर्वे किया। इस दौरान मोहल्ला तालाबपुरा व घुसयाना के चार बच्चे कुपोषित मिले। इनमें दो सगे भाई बहन और दो भाई-भाई है। इन चारों बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया। बच्चों की माताओं का कहना है कि सही समय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बच्चे को एनआरसी में भर्ती करा दिया। मोहल्ला घुसयाना के दो भाई चार साल आठ महीने का सागर व तीन साल आठ महीने का तिलक का वजन निर्धारित मानक से कम पाया गया है। माता पिता के अनुसार उनके शरीर में कुछ भी लगता नहीं है। वर्तमान में यह दोनों जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती हैं। वहीं तालाबपुरा के भाई बहन एक साल एक महीने का वंश और तीन साल की ऋषिका भी कुपोषण का शिकार हैं। वंश की मां लाडकुंवर का कहना है कि जन्म से दोनों बच्चे दुबले हैं। आंगनबाडी कार्यकर्ता ने इन बच्चों के वजन कराने की सलाह दी। जब तौलने पर वजन कम मिला तो इन्हें एनआरसी में भर्ती कराया। पिछले नौ दिन से दोनों बच्चे भर्ती हैं, अब उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। यहां बच्चों को पौष्टिक दूध व उपचार दिया जा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जीपी शुक्ला ने बताया कि 19 अक्टूबर से 17 नवंबर तक चलाए गए संचारी रोग नियंत्रण अभियान में आईसीडीएस विभाग द्वारा 174 अति कुपोषित बच्चो को चिन्हित किया गया। इसके उपरांत चिन्हित बच्चों को उपचार के लिए पलंग की उपलब्धता के आधार पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी नीरज सिंह ने बताया कि चिन्हित में से 90 बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जा चुका है, इनमें 75 बच्चे रिकवर होकर घर पहुंच गए हैं। अब इन बच्चों को आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा फालोअप किया जा रहा है।

एनआरसी में मिलती हैं यह सुविधाएं

नर्सिग आफीसर शाहवाज खान ने बताया कि एनआरसी में बुखार, सर्दी, जुकाम, खून की कमी, प्लेटलेट की कमी, इन्फेक्शन व वजन की कमी वाले बच्चे भर्ती होते हैं। यहां बच्चों को खून की कमी होने पर रक्त चढाया जाता है। विभिन्न जांचे व दवाई भी निशुल्क वितरित की जाती है। बच्चों को दो तरह का दूध दिया जाता है। जो बच्चे दूध आसानी से पी लेते हैं, उन्हें गाढा दूध पिलाया जाता है। वहीं, जिन बच्चों को दूध पीने में समस्या होती है, उन्हें पतला दूध उपलब्ध कराया जाता है।

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