Lalitpur News: LUCC प्रकरण में नई करवट: हाईकोर्ट से राहत, रवि तिवारी और विनोद तिवारी जेल से रिहा

Lalitpur News: एलयूसीसी चिटफंड मामले में गिरफ्तार किए गए कंपनी के मुख्य संचालक रवि तिवारी और उनके भाई विनोद तिवारी को उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत के आदेश के बाद दोनों को जेल से रिहा कर दिया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत द्वारा औपचारिक आदेश जारी किए जाने के पश्चात सोमवार शाम को जेल प्रशासन ने उन्हें मुक्त कर दिया। जेल प्रशासन ने रिहाई की पुष्टि की है।

यह प्रकरण करीब एक माह पूर्व तालबेहट कोतवाली में दर्ज किया गया था। स्थानीय निवासी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर कुछ लोगों पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया। शिकायत में आरोप था कि निवेश के नाम पर लोगों से धन एकत्र कर ठगी की गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ नामजद और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

जांच के दौरान पुलिस ने जिन लोगों के नाम सामने आने का दावा किया, उनमें रवि तिवारी, उनके भाई विनोद तिवारी समेत अन्य सहयोगियों के नाम शामिल थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 जनवरी को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन्हें सीजेएम न्यायालय में पेश किया। वहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

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निचली अदालत से नहीं मिली थी राहत

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे) की अदालत ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में गिरफ्तारी की वैधता और रिमांड प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को शून्य घोषित कर दिया। अदालत ने माना कि प्रक्रिया में कानूनी त्रुटियां थीं, जिसके चलते गिरफ्तारी को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से आरोपियों की रिहाई का आदेश जारी किया।

हालांकि, उच्च न्यायालय का आदेश शुक्रवार को आया था, उस समय स्थानीय अदालतें बंद हो चुकी थीं। इसके बाद दो दिन का अवकाश होने के कारण आदेश पर तत्काल अमल नहीं हो सका। सोमवार को अदालत खुलने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जेल अधीक्षक को लिखित निर्देश भेजे और आदेश का पालन करते हुए दोनों आरोपियों को रिहा कर दिया गया।

जांच जारी रहने की संभावना

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गिरफ्तारी को अवैध ठहराया जाना आरोपों से पूर्ण रूप से बरी होना नहीं माना जाता। मामले की जांच प्रक्रिया अलग से जारी रह सकती है, यदि पुलिस विधिसम्मत तरीके से आगे की कार्रवाई करती है। फिलहाल, इस प्रकरण में अन्य आरोपियों और निवेशकों के दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। एलयूसीसी चिटफंड मामले ने क्षेत्र में काफी चर्चा बटोरी है, क्योंकि इसमें बड़ी रकम के निवेश और कथित धोखाधड़ी का मुद्दा जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हैं।

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