गांव के बच्चों को मिला सुनहरा मौका, यूपी सरकार की बड़ी डिजिटल सौगात, खबर में पूरी जानकारी – UP Government Scheme

UP Government Scheme: लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि गांव के छात्र भी आधुनिक शिक्षा संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उन्हें शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

अब तक ग्रामीण छात्रों को UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। वहां रहने, पढ़ने और कोचिंग की महंगी व्यवस्था कई परिवारों के लिए संभव नहीं हो पाती थी। सरकार की नई डिजिटल लाइब्रेरी योजना इस समस्या का समाधान बनकर सामने आ रही है। इससे गांव में रहने वाले छात्र अपने ही क्षेत्र में बेहतर अध्ययन सामग्री के साथ तैयारी कर सकेंगे।

UP Government Scheme: डिजिटल लाइब्रेरी में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

डिजिटल लाइब्रेरी को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। यहां छात्रों के लिए ई-बुक्स, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट और अभ्यास के लिए क्विज जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और आरामदायक फर्नीचर की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि छात्र बिना किसी परेशानी के लंबे समय तक पढ़ाई कर सकें।

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि लाइब्रेरी में उपलब्ध सामग्री प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम सिलेबस के अनुरूप हो। इससे छात्रों को बार-बार नई किताबें खरीदने या बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करने की आदत छात्रों को भविष्य की जरूरतों के लिए भी तैयार करेगी।

प्रति लाइब्रेरी 4 लाख रुपये का बजट

इस योजना के तहत सरकार ने प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी के लिए करीब 4 लाख रुपये का बजट तय किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकों की खरीद नेशनल बुक ट्रस्ट के माध्यम से की जाएगी, जिससे प्रमाणिक और गुणवत्तापूर्ण किताबें उपलब्ध हो सकें। वहीं कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की खरीद के लिए जेम पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

पंचायत स्तर पर होगा संचालन और निगरानी

डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन ग्राम स्तर पर ही किया जाएगा। इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को सौंपी गई है। इसके साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे, ताकि लाइब्रेरी का सही उपयोग हो और संसाधनों का दुरुपयोग न हो। स्थानीय स्तर पर संचालन होने से ग्रामीण युवाओं में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी। पंचायतों को यह अधिकार दिया गया है कि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार लाइब्रेरी के समय और सुविधाओं को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें।

चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार

राज्य सरकार की योजना है कि डिजिटल लाइब्रेरी को पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। पहले चरण में कई जिलों में इस योजना पर काम शुरू हो चुका है। योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश की करीब 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जाएंगी। इससे लाखों ग्रामीण छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर वे छात्र जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते थे, उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं होगी।

शिक्षा के साथ बढ़ेगी डिजिटल साक्षरता

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता भी बढ़ेगी। कंप्यूटर और इंटरनेट के नियमित उपयोग से छात्र तकनीक के प्रति सहज होंगे, जो आज के समय में किसी भी करियर के लिए जरूरी है। यह योजना गांव और शहर के बीच शिक्षा के अंतर को कम करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से ग्रामीण छात्रों को एक ऐसा मंच मिलेगा, जहां वे अपने सपनों को साकार करने की तैयारी कर सकेंगे। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में गांवों से भी बड़ी संख्या में सफल और सक्षम युवा निकलकर सामने आ सकते हैं।

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