UP News: फेसबुक से प्यार, चार साल लिव-इन और कोर्ट मैरिज, अब पति गायब

UP News: भारत में रिश्तों की कहानी अक्सर सोशल मीडिया से शुरू होकर असली जीवन तक पहुँचती है। ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम (मेरठ) कंकरखेड़ा क्षेत्र में सामने आई है, जहाँ फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती ने प्यार का रूप लिया और चार साल तक लिव इन में रहने के बाद कोर्ट मैरिज की। लेकिन शादी के बाद मामला विवाद में बदल गया और युवती को अपनी ससुराल में बहू मानने से मना कर दिया गया।

कंकरखेड़ा के गांव निवासी गौरव और युवती की मुलाकात चार साल पहले फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर शेयर किए और धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला प्यार में बदल गया। चार साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद, मार्च 2025 में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली।

शादी के बाद ससुराल में विवाद

शादी के बाद गौरव के परिवार वालों ने युवती को बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया। यह मुद्दा विवाद का कारण बना और युवती ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। शिकायत के बाद मामला परिवार परामर्श केंद्र में भी चल रहा है। युवती ने कई बार गौरव से आग्रह किया कि उसे घर ले जाए, लेकिन बात नहीं बनी।

ससुराल में मारपीट का मामला

शुक्रवार को युवती अपनी ससुराल पावली खुर्द पहुँची, जहां गौरव और उनके परिवार के लोग मौजूद थे। युवती को देखते ही ससुराल वाले आग बबूला हो गए। ग्रामीणों के अनुसार, गौरव ने युवती के साथ मारपीट की और मौके से भाग गया। इस दौरान किसी ने डायल-112 पर सूचना दी और पुलिस रात में मौके पर पहुंची।

इंस्पेक्टर विनय कुमार ने बताया कि युवती और गौरव की शादी कोर्ट में हुई है और कानूनी रूप से गौरव उसका पति है। युवती अपनी ससुराल गई थी, लेकिन गौरव मारपीट करने के बाद वहां से भाग गया। पुलिस ने कहा कि बाकी स्वजन घर पर मौजूद हैं। यदि युवती द्वारा मारपीट की तहरीर दर्ज कराई जाती है, तो पुलिस मामले की जांच करेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

सामाजिक और कानूनी पहलू

यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि सामाजिक और कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। परिवार के सदस्य विवाह के बाद भी बहू को स्वीकार न करना, कानूनी और सामाजिक दोनों रूप से अनुचित है। कोर्ट मैरिज के बाद पति-पत्नी के अधिकार कानूनन सुरक्षित हैं।

इस घटना से यह भी पता चलता है कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए कानूनी रास्ता अपनाएं। चाहे मामला लिव इन रिलेशनशिप का हो या कोर्ट मैरिज का, महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए और पुलिस या परिवार परामर्श केंद्र जैसी संस्थाओं की मदद लेनी चाहिए।

कहानी यह दिखाती है कि सोशल मीडिया से शुरू हुई दोस्ती कभी-कभी गंभीर विवाद का कारण भी बन सकती है। चार साल तक साथ रहने और कोर्ट मैरिज करने के बाद भी समाज और परिवार का विरोध युवतियों के लिए चुनौती बन सकता है। यह घटना सभी के लिए एक उदाहरण है कि कानूनी उपाय अपनाना और अपने अधिकारों की रक्षा करना कितना आवश्यक है।

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