April 20, 2024
क्रोध उल्टा वार करता है!

क्रोध उल्टा वार करता है!

क्रोध उल्टा वार करता है! क्रोध एक प्रतिक्रिया है जो इसे व्यक्त करने वाले पर ही चौतरफा वार करती है। क्रोध करने वाले का तन,मन ही नहीं उसके रिश्ते और छवि सब आहत होते हैं। क्रोध दिमाग के साथ-साथ शरीर के लिए कितना जोखिम-भरा हो सकता है और इससे कैसे उबरें, पढ़े यह लेख.. हर किसी को दिन में एक बार गुस्सा आता है। कभी जाम में गाड़ी फंसने के दौरान या फिर जब घर में ही कोई काम बढ़ जाए, गुस्से की भावनाएं हमारे अंदर उत्पन्न हो सकती हैं।

डब्लूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक भारत की 70 फीसदी (2019) जनसंख्या तनावग्रस्त है। विशेषज्ञ कहते हैं कि तनावग्रस्त जनसंख्या में से लगभग 25 से 30 फीसदी लोग गुस्से की समस्या से गुजरते हैं क्योंकि क्रोध तनाव का एक अस्वस्थ अभिव्यक्ति मार्ग (अनहेल्दी आउटलेट) भी होता है। कोविड-19 से पहले गुस्से, पारिवारिक झगड़े की समस्या से ग्रसित मरीजों की संख्या कम होती थी और अन्य मानसिक समस्याओं के मरीज ज्यादा होते थे। कोविड के बाद गुस्से, ब्रेन की हाइपर एक्टिविटी और चिड़चिड़ेपन की समस्या से ग्रस्त लोगों की संख्या 2-3 गुना बढ़ी है। घर में गुस्से की वजह से घरेलू हिंसा, दंपती के सम्बंधों में तनाव और पारिवारिक समस्याएं 3 गुना बढ़ी हैं। क्रोध उल्टा वार करता है!

यह बनते हैं गुस्से का कारण
क्रोध उल्टा वार करता है! अक्सर देखा गया है आमतौर पर क्रोध का उबाल लम्बे समय तक नहीं रहता है। किन्तु किसी लम्बे तनाव के चलते लोगों में चिड़चिड़ाहट, स्वयं को किसी काम के लिए दोषी मानते रहना, भावनाओं को न दिखा पाना, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक संकट, काम से जुड़ा तनाव या रिश्तों में चल रही मुश्किलों के कारण यह भीतरी उबाल गंभीर रूप ले सकता है। कुछ लोगों में मानसिक विकारों के कारण भी क्रोध की प्रवृत्ति देखी जाती है। सामान्यतः अवसाद से ग्रस्त लोगों में छोटी से छोटी स्थिति में निराशा और क्रोध आने की समस्या देखी जा सकती है। ऐसे में हमेशा चिड़चिड़ाहट शरीर और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचाती है।

इस प्रकार पहचानें अपने गुस्से के लक्षण
जब किसी व्यक्ति को अत्यधिक ज्यादा गुस्सा आता है तो जरूरी नहीं कि मनुष्य के दिमाग में उस दौरान कुछ चल रहा हो या कोई विचार आ रहे हों, अधिकतर देखने में आता है कि जब गुस्सा अधिक ज्यादा बढ़ जाता है तो विचार कम आते हैं और शरीर में हलचल ज्यादा होती है। सांस फूलने, थरथराहट महसूस होने, पसीना छूटने और अचानक सिरदर्द जैसी समस्याएं नजर आने लगती हैं। उस समय इंसान के विचार भावना मंे बदल जाते हैं, जिसमें इंसान दांत पीसने लगता है, बड़बड़ाने लगता या उसकी सांसे फूलने लगती हैं। कई लोगों में बदले की भावना या पीड़ा की भावना बहुत बढ़ जाती है। बार-बार एक ही विचार चलता है। कई बार क्रोधित व्यक्ति का लगातार एक ही विचार पर मनन उसे रूला देता है या उसकी आवाज बहुत ऊंची हो जाती है, यानी वो चिल्लाकर बात करने लगता है।

गुस्से के प्रभाव

मन और शरीर का एक-दूसरे पर प्रभाव- अगर मानसिक तनाव बढ़ता है तो शरीर पर भी उसका दुष्प्रभाव होगा। वहीं शरीर पर किसी रोग का हमला होगा, तो वह मानसिक तनाव को भी बढ़ाएगा।

क्रोध की स्थिति में दांतों का कम्पन होना- शरीर में थरथराहट होने लगती है, रक्तचाप बढ़ जाता है, पसीना छूटने लगता है, सांस फूलने लगती है।

बहुत लोग ब्रेन हाइपर एक्टिविटी- ऐसी स्थिति में दिमाग का बहुत तेज दौड़ना या ब्रेन फॉग (मस्तिष्क की सोचने की क्षमता कम होना) या सुन्नपन का भी अनुभव करते हैं।

बहुत गुस्सा हानिकारक- जो लोग बहुत गुस्सा करते हैं उनका ब्लड प्रेशर, धड़कन हमेशा बहुत बढ़ी हुई रहती है। लम्बे समय में उन्हें भूलने या ध्यान केन्द्रित करने की दिक्कत होने लगती है।

अधिक गुस्से का कारण सिरदर्द- अधिक गुस्सा करने पर सिरदर्द होने लगता है, तनाव, बालों का झड़ना, आंखों के आसपास झुर्रियां होना, गले की बाहरी त्वचा पर खिंचाव होना या सांस फूलने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

अत्यधिक गुस्से का कारण आंतों का रोग- अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण आंतों का रोग, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी पेट की समस्याएं आम होती हैं।

गुस्सा एक तरह का तनाव- आमतौर पर माने तो गुस्सा एक तरह का तनाव होता है, इस भाव के अनियंत्रित होने से कब्ज और पैरों में कमजोरी महसूस होती है। अधिक गुस्सा करने वाले लोग तनाव को अपने मन में रोककर रखते हैं जिसके कारण उनके हाथ भींचे हुए हो सकते हैं, पांव की उंगलियां भी दबी या खिंची हो सकती हैं, रक्तचाप बढ़ सकता है और उनके शरीर में विटामिन्स की कमी देखने को मिलती है।

क्रोध से पैदा होने वाले स्टरेस हॉर्मोन के कारण सूजन बढ़ती है- और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे हृदय कमजोर होने लगता है। नींद खराब हो जाती है क्योंकि कोशिकाएं हैप्पी हार्माेन को अवशोषित नहीं कर पातीं हैं।

रिश्तों पर भी पड़ता है असर- बहुत गुस्सा आने पर निजी जीवन पर भी प्रभाव पड़ता है। आपके अपने माता-पिता, बच्चे और जीवनसाथी से रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं, भले ही आपका गुस्सा व्यवहार में उतर जाए तो जुबान पर काबू नहीं रहता। इससे पारिवारिक या पेशेवर जीवन को संभालना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि हर इंसान गुस्से को समझ नहीं सकता है।

गुस्से के निदान उपाय समझे

  • गुस्से का कारण

क्रोध पर काबू पाने के लिए सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा कि क्रोध की अधिकता है और उसके चलते नुकसान हो रहा है। इसके बाद कारणों पर गौर करना होगा। क्या किसी ने खराब काम किया है? क्या बच्चों ने कमरा साफ नहीं किया? घरेलू मददगार नहीं आई और काम बहुत है, मदद कोई नहीं? जिस भी वजह से क्रोध आ रहा है, उसे पहचानें।

  • क्रोध में दूसरे पर उंगली नहीं उठायें

क्रोध करने वाले दूसरों पर ही उंगली उठाते हैं। क्रोध की जड़ यही होती है कि वे हर कार्य में दूसरे को बीच में रखकर देखते हैं और दोषारोपण करते हुए आपा खो बैठते हैं। अगर इसी समय खुद को शामिल कर लें, जैसे तुम खाने की मेज से उठकर सीधे कमरे में चले जाते हैं। यहां संतुलित स्वर में भावना भी व्यक्त हो जाएगी और क्रोध भी नहीं करना पड़ेगा।

  • गुस्से को तुरंत भूलना

गुस्सा अगर आ रहा है तो उसे तुरंत भूलना दरकिनार करना गुस्से पर काबू पाना जैसा होता है। क्रोध दिलाने वाले का कोई नुकसान नहीं होता, सारी क्षति क्रोध करने वाले को होती है। भले वो किसी के साथ हिंसा कर बैठे, उसे शारीरिक चोट लगेगी, लेकिन क्रोधी मानसिक, शारीरिक व सामाजिक हर तरह की क्षति झेलेगा।

  • खुद पर ध्यान देना शुरू करें

जब भी गुस्सा आए तो लम्बी और गहरी सांस लें। इससे दिमाग को ऑक्सीजन मिलती है जिससे गुस्से की समस्या को कम किया जा सकता है।

  • गुस्से से ध्यान हटाने की कोशिश करें

यदि आप ऐसे लोगों के बीच हैं जिनकी बातें सुनकर आपको गुस्सा आ रहा है तो वहां से हटने की कोशिश करें। इसके अलावा मन ही मन 100 से 1 तक की उल्टी गिनती बोलें। इससे ध्यान हटेगा और धीरे-धीरे गुस्सा शांत हो जाएगा।

  • अपनी खुशी तलाशें

अपनी जीवनशैली में ऐसी गतिविधियों को शामिल करें जिनसे खुशी मिले। माइंडफुल गतिविधियां दिमाग को शांत रखने में मदद करती हैं।

  • शारीरिक गतिविधि है कारगर

तनाव दूर करेंगे तो गुस्सा खुद-ब-खुद शांत हो जाएगा। तनाव के लिए शारीरिक गतिविधि या व्यायाम कर सकते हैं। अगर आपको गुस्सा बढ़ने का अहसास होता है तो तेजी से चलना शुरू कर दें। ऐसा करने से ध्यान दूसरी चीजों की तरफ चला जाएगा और गुस्से को कम करने में मदद मिलेगी।

  • ध्यान लगा सकते हैं

योग और मेडिटेशन भी काफी हद तक गुस्से को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। यदि गुस्से का स्तर बहुत अधिक है तो किसी मनोचिकित्सक से सलाह लेना भी आवश्यक है।


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